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पितृ दोष (Pitra Dosh)

पितृ दोष

मानव जीवन में पितृ दोष भी एक बहुत बड़ी समस्या है, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि कुण्डली का पंचम भाव राहु, केतु, सूर्य, शनि इनमें से किसी भी ग्रह द्वारा प्रभावित होता तब पितृ दोष की समस्या उत्पन्न होती है। पितृ दोष हमारे पूर्वजों की आत्मा अतृप्त होने के कारण उत्पन्न होता है शारदीय नवरात्रि शुरू होने के 15 दिन पूर्व जो दिवस होते हैं, उनमें हमारे पूर्वजों के प्रति श्राद्ध, तर्पण किया जाता है जिसमें भोजन ब्राह्मणों को खिलाया जाता है तथा पूर्वजों के निमित्त दान आदि भी दिया जाता है जिससे हमारे पूर्वजों की आत्मा को तृप्ति मिलती है तथा श्राद्ध दिवसों में प्रति दिन पूर्वजों को जल, तिल, जौ, चावल, कुश आदि अर्पित करते हैं वस्त्र भी पूर्वजों के निमित्त अवश्य दान करना चाहिए। इस भावना के माध्यम से हमारे पूर्वज इन चीजों को स्वीकार करते हैं और उसके बदले में हमारे व परिवार के प्रति उनकी कृपा प्राप्त होने की संभावना बनती है। हमारे परिवार में अगर किसी की जब मृत्यु होती है तो उस आत्मा के प्रति भी श्रद्धा रखते हुए उसका क्रिया क्रम भी विधि-विधान के साथ करना चाहिए तथा उस आत्मा के निमित्त भी ब्राह्मण को वह सभी चीजें दान करनी चाहिए जो चीजें मृतक को खाने या पहनने या इस्तेमाल करने में अच्छी लगती थीं। इससे उस आत्मा को तृप्ति मिलती है और उसका सहयोग भी हमारे परिवार के लिए बनने की संभावना बनती है, यह पितृ दोष पिछली कई पीढ़ियों का भी हो सकता है, और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाता रहता है। इसका निराकरण करना बहुत ही दुःसाध्य होता है। इसमें यह भी पता करना पड़ता है कि यह दोष किस पीढ़ी का है, पुरुष का है, या स्त्री का है। वह कैसे संतुष्ट होगा यह भी देखना पड़ता है। इसके निराकरण के लिए यंत्र का दक्षिणा शुल्क 11000/- है। इस यंत्र के माध्यम से पितृ दोष दूर होने की संभावना बनती है।