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काल सर्प दोष
एक विशेष प्रकार का ग्रह दोष बनता है जिसे काल सर्प दोष कहा जाता है। यह ग्रह दोष राहु व केतु के बीच में सारे ग्रह आ जाने की वजह से बनता है। यदि किसी मनुष्य की जन्म कुंडली में राहु व केतु की बीच में सारे ग्रह आ जाते हैं तो काल सर्प दोष का निर्माण उस व्यक्ति की कुण्डली में हो जाता है। यदि एक ग्रह को छोड़कर बाकी सारे ग्रह राहु व केतु छाया ग्रहों के बीच आ जायें तो आंशिक काल सर्प दोष कहलाता है इस ग्रह दोष से भी जातक को जीवन में कठिनाई का अनुभव करना पड़ता है तथा जीवन में संघर्ष भी ज्यादा करने पड़ जाते हैं। इस ग्रह दोष से मनुष्य का जीवन संतुलित नहीं हो पाता है, अर्थात् कोई एक पक्ष ज्यादा प्रबल हो जाता है तथा जीवन का दूसरा पक्ष अधूरा रह जाता है। अच्छा जीवन व्यतीत करने के लिए जीवन का संतुलित होना अति आवश्यक है, अर्थात् भौतिकता व आध्यात्मिकता दोनों का होना जरूरी है। ऐसे जातक या तो भौतिकता की तरफ या आध्यात्मिकता या किसी विशेष क्षेत्र में जैसे वैज्ञानिक, अच्छा राजनीतिज्ञ, अच्छा व्यवसायिक, अच्छा संगीतज्ञ, अच्छा कलाकार, जिसका देश व समाज में विशेष स्थान होते हैं। लेकिन ऐसे व्यक्तियों का दूसरा पक्ष बहुत कमजोर होता है जैसे हो सकता है कि उसने विवाह ही न किया हो या उसका घर परिवार से कोई मतलब न हो, या आध्यात्मिक क्षेत्र में जाने की वजह से घर परिवार को छोड़ दिया हो, उच्च कोटि का संत हो गया हो। इससे घबराने की जरूरत नहीं है, कुछ लोग काल सर्प दोष नाम लेकर दूसरे को डराने की कोशिश भी करते हैं। इसकी नासिक व उज्जैन में करायी जाती है। इसके लिए भी सम्बन्धित यंत्र उपलब्ध है जिसका दक्षिणा शुल्क 6000/- है इस यंत्र के माध्यम से काल सर्प दोष दूर होने की संभावना बनती है।