Month: March 2021

पितृ दोष (Pitra Dosh)

पितृ दोष

मानव जीवन में पितृ दोष भी एक बहुत बड़ी समस्या है, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि कुण्डली का पंचम भाव राहु, केतु, सूर्य, शनि इनमें से किसी भी ग्रह द्वारा प्रभावित होता तब पितृ दोष की समस्या उत्पन्न होती है। पितृ दोष हमारे पूर्वजों की आत्मा अतृप्त होने के कारण उत्पन्न होता है शारदीय नवरात्रि शुरू होने के 15 दिन पूर्व जो दिवस होते हैं, उनमें हमारे पूर्वजों के प्रति श्राद्ध, तर्पण किया जाता है जिसमें भोजन ब्राह्मणों को खिलाया जाता है तथा पूर्वजों के निमित्त दान आदि भी दिया जाता है जिससे हमारे पूर्वजों की आत्मा को तृप्ति मिलती है तथा श्राद्ध दिवसों में प्रति दिन पूर्वजों को जल, तिल, जौ, चावल, कुश आदि अर्पित करते हैं वस्त्र भी पूर्वजों के निमित्त अवश्य दान करना चाहिए। इस भावना के माध्यम से हमारे पूर्वज इन चीजों को स्वीकार करते हैं और उसके बदले में हमारे व परिवार के प्रति उनकी कृपा प्राप्त होने की संभावना बनती है। हमारे परिवार में अगर किसी की जब मृत्यु होती है तो उस आत्मा के प्रति भी श्रद्धा रखते हुए उसका क्रिया क्रम भी विधि-विधान के साथ करना चाहिए तथा उस आत्मा के निमित्त भी ब्राह्मण को वह सभी चीजें दान करनी चाहिए जो चीजें मृतक को खाने या पहनने या इस्तेमाल करने में अच्छी लगती थीं। इससे उस आत्मा को तृप्ति मिलती है और उसका सहयोग भी हमारे परिवार के लिए बनने की संभावना बनती है, यह पितृ दोष पिछली कई पीढ़ियों का भी हो सकता है, और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाता रहता है। इसका निराकरण करना बहुत ही दुःसाध्य होता है। इसमें यह भी पता करना पड़ता है कि यह दोष किस पीढ़ी का है, पुरुष का है, या स्त्री का है। वह कैसे संतुष्ट होगा यह भी देखना पड़ता है। इसके निराकरण के लिए यंत्र का दक्षिणा शुल्क 11000/- है। इस यंत्र के माध्यम से पितृ दोष दूर होने की संभावना बनती है।

सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा (Positive and Negative Energy)

सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा

प्रत्येक मानव जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त किसी न किसी बात को लेकर संघर्ष करता रहता है, उसका कारण पूर्वजन्मकृत कर्मों के कारण से यह जीवन मिलता है। जिस समय जातक का जन्म होता है, उस समय ब्रह्माण्ड में ग्रहों, नक्षत्रों, तारों की जो स्थिति होती है, उसका प्रभाव इस मानव जीवन पर प्रारम्भ से अन्त तक पड़ता है। जैसे-जैसे जीवन में ग्रहों की महादशा, अन्तर्दशा, प्रत्यन्तरदशा, सूक्ष्मदशा तथा ग्रहों, नक्षत्रों का राशियों में प्रभाव व परिवर्तन होता है, उसी के अनुसार हमारे जीवन में स्थिति परिवर्तित होती रहती है। यह वैज्ञानिक है। कोई भी ग्रह या राशि खराब नहीं होती है। हमारे शरीर में जो ग्रहों, नक्षत्रों की ऊर्जा है, उसका किसी समय विशेष पर बाहरी ब्रह्माण्ड से कैसा सामंजस्य है, अगर सामंजस्य अच्छा है तो उस समय हमें सुख की अनुभूति होगी, और हमारे काम भी बनते नजर आयेंगे। अगर हमारे शरीर में व्याप्त ग्रहों की ऊर्जा का बाहरी ब्रह्माण्ड से तारतम्य अच्छा नहीं है तो दुख, परेशानी, बाधा, पीड़ा, रोग आदि की संभावना बन सकती है। ग्रहों की ऊर्जा ही मनुष्य से भिन्न-भिन्न कार्य करवाती है। इसमें सकारात्मक ऊर्जा अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित करती है तथा नकारात्मक ऊर्जा गलत कार्य करने के लिए प्रेरित करती है, इस नकारात्मक ऊर्जा के कारण ही मनुष्य को विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस नकारात्मक ऊर्जा की जाँच करके इसे यंत्र द्वारा शून्य किया जा सकता है तथा सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाया जा सकता है, जिससे मनुष्य के कार्य करने की क्षमता बढ़ती है और यदि बीमार है तो रोग से लड़ने की क्षमता भी बढ़ जाती है। यह यंत्र प्राप्त किया जा सकता है। यंत्र का दक्षिणा शुल्क 5500/- है।

बंधन दोष (Bandhan Dosh)

बंधन दोष

ग्रहों की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण से मनुष्य बन्धन दोष जैसे जटिल दोष से भी प्रभावित हो जाता है इस बन्धन दोष को काला जादू भी कहा जाता है यह बन्धन दोष को काला जादू ईर्ष्या द्वेष के कारण किसी व्यक्ति विशेष या रिश्तेदार या परिचित द्वारा उससे ईर्ष्या के कारण या उसको अपने वश में करने के लिए या उसके कार्यों को प्रभावित करने के लिए या उसके कार्यों को जीवन में ऊँचाई पर परिश्रम करने के बावजूद भी न उठ सके। यद्यपि यह सब कार्य निम्न स्तर के होते हैं और इसका खामियाजा भी ऐसा करने वाले को भुगतना पड़ता है लेकिन जिस व्यक्ति पर ऐसा किया जाता है वह तो परेशान रहता ही है और इसका प्रभाव तक तक समाप्त नहीं होता, जब तक कि इसका समाधान न कर लिया जाये, इस कष्ट को भुगतने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। अगर किसी व्यक्ति को करने वाले से ज्यादा ज्ञान है, इस विधा का, तब तो इस कष्ट से निवृत्त हो जायेगा। अगर ज्ञान नहीं है, लेकिन इस बात का एहसास है कि मेरे अथक परिश्रम तन, मन और धन से करने के बावजूद भी परिणाम नहीं आ रहा है, तो योग्य व्यक्ति से मिलकर अपनी इस समस्या का समाधान कर सकते हैं। यह समस्याएं कई बार इतनी जटिल होती हैं कि स्वयं अपनी दैनिक पूजा से भी ठीक नहीं हो पातीं। व्यवसाय में भी इस तरह की चीजें प्रतिस्पर्धा के कारण देखी जाती हैं। कुछ सूक्ष्म चीजें हमें अपनी आँखों से दिखाई नहीं देती लेकिन वह अपना प्रभाव सूक्ष्म रूप से डालती रहती हैं। इस बन्धन दोष या काला जादू के लिए भी यंत्र उपलब्ध है जिसका न्योछावर राशि 5500/- है और यंत्र के माध्यम से यह दोष दूर हो सकता है।

काल सर्प दोष (Kaal Sarp Dosh)

काल सर्प दोष

एक विशेष प्रकार का ग्रह दोष बनता है जिसे काल सर्प दोष कहा जाता है। यह ग्रह दोष राहु व केतु के बीच में सारे ग्रह आ जाने की वजह से बनता है। यदि किसी मनुष्य की जन्म कुंडली में राहु व केतु की बीच में सारे ग्रह आ जाते हैं तो काल सर्प दोष का निर्माण उस व्यक्ति की कुण्डली में हो जाता है। यदि एक ग्रह को छोड़कर बाकी सारे ग्रह राहु व केतु छाया ग्रहों के बीच आ जायें तो आंशिक काल सर्प दोष कहलाता है इस ग्रह दोष से भी जातक को जीवन में कठिनाई का अनुभव करना पड़ता है तथा जीवन में संघर्ष भी ज्यादा करने पड़ जाते हैं। इस ग्रह दोष से मनुष्य का जीवन संतुलित नहीं हो पाता है, अर्थात् कोई एक पक्ष ज्यादा प्रबल हो जाता है तथा जीवन का दूसरा पक्ष अधूरा रह जाता है। अच्छा जीवन व्यतीत करने के लिए जीवन का संतुलित होना अति आवश्यक है, अर्थात् भौतिकता व आध्यात्मिकता दोनों का होना जरूरी है। ऐसे जातक या तो भौतिकता की तरफ या आध्यात्मिकता या किसी विशेष क्षेत्र में जैसे वैज्ञानिक, अच्छा राजनीतिज्ञ, अच्छा व्यवसायिक, अच्छा संगीतज्ञ, अच्छा कलाकार, जिसका देश व समाज में विशेष स्थान होते हैं। लेकिन ऐसे व्यक्तियों का दूसरा पक्ष बहुत कमजोर होता है जैसे हो सकता है कि उसने विवाह ही न किया हो या उसका घर परिवार से कोई मतलब न हो, या आध्यात्मिक क्षेत्र में जाने की वजह से घर परिवार को छोड़ दिया हो, उच्च कोटि का संत हो गया हो। इससे घबराने की जरूरत नहीं है, कुछ लोग काल सर्प दोष नाम लेकर दूसरे को डराने की कोशिश भी करते हैं। इसकी नासिक व उज्जैन में करायी जाती है। इसके लिए भी सम्बन्धित यंत्र उपलब्ध है जिसका दक्षिणा शुल्क 6000/- है इस यंत्र के माध्यम से काल सर्प दोष दूर होने की संभावना बनती है।

मांगलिक दोष (Manglik Dosh)

मांगलिक दोष

विवाह तय होने के समय एक विशेष प्रकार का दोष देखा जाता है, जिसे मांगलिक दोष कहते हैं। विवाह के लिए इसका विचार अवश्य करना चाहिए। वर या वधू में से यदि एक मांगलिक दोष से युक्त है तो उसका विवाह भी ऐसे से करना चाहिए जो मांगलिक दोष से युक्त हो, अर्थात् वर और वधू दोनों मांगलिक दोष से युक्त हों, या दोनों मांगलिक दोष से मुक्त होना चाहिए। मांगलिक दोष होना खराब नहीं है, लेकिन यह विवाह के लिए विचारणीय हो जाता है। यदि वर या वधू किसी एक की कुण्डली में मांगलिक दोष है और दूसरे की कुण्डली में मांगलिक दोष नहीं है तो ऐसे में पार्टनर से या तो वाद-विवाद, लड़ाई झगड़ा या कुटुम्ब में लड़ाई झगड़ा या पार्टनर का स्वास्थ्य अक्सर खराब रहना या पार्टनर की असमय मृत्यु हो जाना या पार्टनर की दुर्घटना होने की संभावना या पार्टनर का एक दूसरे से किसी कारण से अलग रहना या पार्टनर का रोजगार की वजह से काफी अलग रहने की संभावना बनती है ऐसे में वैवाहिक जीवन सुखी होने की संभावना नहीं बनती है। यदि चंद्र कुण्डली से मांगलिक दोष है तो विवाह में अनायास विलम्ब होता है, ऐसे में वर या वधू स्वयं ही विवाह करने से बिना कारण मना करते हैं और विवाह में विलम्ब हो जाता है। मांगलिक दोष का शमन करने के लिए यंत्र उपलब्ध है जिसकी न्योछावर राशि 5500/- है।

नजर दोष (Najar Dosh)

नजर दोष

जीवन में कई बार इस बात का एहसास होता है कि मेरा कार्य सुचारू रूप से चल रहा है तो अचानक किसी विशेष ऊर्जा के प्रभाव से हमारे कार्यों में रुकावट आना शुरू हो जाती है। इसके अलावा यह भी देखा जाता है कि कोई बच्चा बहुत एक्टिव है या कोई स्त्री बहुत सुन्दर है तो वह अचानक बीमार पड़ जाती है तो इसका कारण भी किसी व्यक्ति विशेष की ऊर्जा हो सकती है, जो उसको प्रभावित कर गयी हो। यह भी हो सकता है कि ब्रह्माण्ड में सूक्ष्म रूप कुछ शक्तियां विचरण करती रहती हैं, जो हमें इन आँखों से दिखाई नहीं पड़तीं। यह अतृप्त शक्तियाँ/आत्माओं को शरीर की आवश्यकता होती है, जो अपनी सूक्ष्म शरीर के माध्यम से इन भौतिक शरीर में प्रवेश करके अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने की कोशिश करती हैं, जिस कारण से बच्चा या स्त्री अपने होश में नहीं रहती है, और इससे उनको शारीरिक व मानसिक रूप से पीड़ा झेलनी पड़ती है। कभी-कभी किसी दूसरे प्रत्यक्ष मनुष्य की ऊर्जा भी नकारात्मक प्रभाव उनके कार्य व शरीर पर डालती हैं, जिससे उनको अपने कार्यों को पूरा करने में काफी कठिनाई का अनुभव होता है, जिसे आजकल के समय में नजर दोष भी कहा जाता है। अगर इसका उपाय पूजा पाठ करके न किया जाये तो ठीक होना बहुत मुश्किल हो जाता है, जिससे व्यक्ति का धन व समय दोनों बर्बाद होता है और सफलता भी मिलना मुश्किल हो जाता है। नजरदोष को भी यंत्र के माध्यम से तत्काल दूर किया जा सकता है। यह सम्बन्धित यंत्र उपलब्ध है, जिसकी न्योछावर राशि 5500/- है।